future aayne me dikhta hoga, ye sochkar vo sheeshe ke ghar me rahte hai, pens ne dhokha de diya to kya, hud ho gaye janab,kalam chod ke blog pe likhte hai! lo ho gaya aagaj,anjam hona abhi baaki hai abhi to dhakkan khula hai, puri botal......n.. abhi baki hai
अद्भुत सौंदर्य!! रूपवादी होते जा रहे हो. पेंटिंग बहुत अच्छी है लेकिन शब्दों की महिमा पर इतना कम ध्यान क्यों? केवल एक जगह शब्द दिखाई देते हैं, ब्लॉग के नाम में - 'सबदकबीर'. हमें कुछ और शब्दों की जरूरत है भाई!!!
बहुत अच्छी सजावट है आपके ब्लॉग की! इसमे आत्मा भी डालिए ताकि कुछ जीवन महसूस किया जा सके. सजावट तभी अच्छी लगती है जब पूरे शोरोगुल के उसमें एक जीता जागता संसार वाईब्रेट होता है! जरूरी नहीं कि कवितायें हों, समाज और राजनीति को लेकर धारदार निबंध भी हो सकते हैं. आख़िर मुक्तिबोध ने तो लिखें ही हैं - ढेर सारे और महत्वपूर्ण निबंध!! आपकी पॉलिटिक्स क्या है!!? साहित्य को छोड़कर पॉलिटिक्स सम्भव नहीं है. मुझे मुआफ करें!!
7 comments:
नया ब्लॉग बना लेने भर से कैसे चलेगा। न माहताब, न सूरज, न अंधेरा, न सुबह। अरे कायदे से आगाज़ तो कीजिए। लोकायन में एकदम सन्नाटा है।
future aayne me dikhta hoga,
ye sochkar vo sheeshe ke ghar me rahte hai,
pens ne dhokha de diya to kya,
hud ho gaye janab,kalam chod ke blog pe likhte hai!
lo ho gaya aagaj,anjam hona abhi baaki hai
abhi to dhakkan khula hai,
puri botal......n.. abhi baki hai
अद्भुत सौंदर्य!! रूपवादी होते जा रहे हो. पेंटिंग बहुत अच्छी है लेकिन शब्दों की महिमा पर इतना कम ध्यान क्यों? केवल एक जगह शब्द दिखाई देते हैं, ब्लॉग के नाम में - 'सबदकबीर'. हमें कुछ और शब्दों की जरूरत है भाई!!!
ब्लाग का रंग और रूप 'अतीन्द्रिय'और कल्पना के उदय से 'प्रकाशी' कलेवर का हो गया है।
आशा है, जल्दी ही इस पर कुछ काले-काले अच्छर भी दिखाई देंगे।
"चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती". चंपा कैसे पढेगी इस ब्लॉग को? वो देखेगी!!
बहुत अच्छी सजावट है आपके ब्लॉग की! इसमे आत्मा भी डालिए ताकि कुछ जीवन महसूस किया जा सके. सजावट तभी अच्छी लगती है जब पूरे शोरोगुल के उसमें एक जीता जागता संसार वाईब्रेट होता है! जरूरी नहीं कि कवितायें हों, समाज और राजनीति को लेकर धारदार निबंध भी हो सकते हैं. आख़िर मुक्तिबोध ने तो लिखें ही हैं - ढेर सारे और महत्वपूर्ण निबंध!! आपकी पॉलिटिक्स क्या है!!? साहित्य को छोड़कर पॉलिटिक्स सम्भव नहीं है. मुझे मुआफ करें!!
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